प्रोफेशनल कोर्स की फीस बीच में नहीं बढ़ सकती: सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला
अदालत ने कहा कि छात्रों को प्रवेश से पहले पूरे कोर्स की फीस पता होनी चाहिए; विशेष परिस्थितियों में ही बदलाव संभव है।

प्रकाशित: 16 अक्टूबर 2026 (भारतीय समय); स्रोत: 15–16 अक्टूबर तक की रिपोर्ट।
कोर्स के बीच फीस पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निजी स्व-वित्तपोषित संस्थानों के प्रोफेशनल कोर्स में छात्र के दाखिले के बाद सामान्य रूप से फीस नहीं बढ़ाई जानी चाहिए। 14 अक्टूबर का यह फैसला डॉ. बी.सी. रॉय इंजीनियरिंग कॉलेज के एक फीस विवाद से जुड़ा है।
छात्रों के लिए निश्चित फीस क्यों जरूरी है
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे ने कहा कि परिवार अक्सर पूरे कोर्स के खर्च के लिए बचत या कर्ज का इंतजाम करते हैं। इसलिए पहले से तय फीस में स्थिरता महत्वपूर्ण है। हालांकि असाधारण और अप्रत्याशित खर्च के मामले अलग हो सकते हैं।
संस्थानों पर फैसला कैसे लागू होगा
अदालत ने फीस निर्धारित करने वाली समितियों को समय पर स्पष्ट जानकारी देने पर जोर दिया। विवाद होने पर छात्र प्रवेश पत्र, प्रॉस्पेक्टस और नियमों की जांच कर सकते हैं।
स्रोत और पुष्टि
मूल रिपोर्ट और संभावित नए अपडेट देखें: मूल रिपोर्ट
यह पुरानी संदर्भ तस्वीर है, वास्तविक घटना की नहीं।
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